Wednesday, June 9, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- अकिंचन

नाम--गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द सक्ती
जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़
विधा---कविता
विषय-अकिंचन
शीर्षक----कोई बात नहीं  मैं अकिंचन हूं 

कोई बात नहीं, मैं अकिंचन हूं ।
मेरे स्वामी तो सबसे बड़े धनवान ।
मेरे पास भले ,धन का अभाव है ।
मेरे स्वामी तो सबसे बड़े गुणवान ।

जब चाहूं उनसे,मिल जाता है धन ।
उनके कारण से मेरा, है सुखमय जीवन ।
अकिंचन का मुझको,आभास ही नहीं ।
खुश हूं मैं जहां में होकर अकिंचन ।

सोच रहा हूं सब मेरे जैसे हो अकिंचन ।
फिर रटना पड़ेगा नहीं  चाहिए धन धन ।
अकिंचन के पास सदा होते  हैं भगवान ।
उनके साथ रहने का उनका रहता है मन ।

अकिंचन हर जन्म मुझे बनाना भगवन ।
सुदामा कृष्ण की तरह हो हमारा मिलन ।
करुं इसके लिए मैं  प्रार्थना और निवेदन ।
भाया है मेरे मन को रहना अब अकिंचन ।

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