स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा---आलेख /कविता/ ग़ज़ल
विषय ----जहाज
शीर्षक ----जहाज बनाले
राम नाम खुद का ,जहाज बनाले ।
भवसागर पार जाने का ,काज बनाले ।
इसी के सहारे दुनियां पार उतरे ।
चाहे रहे सुख या चाहे रहे दुख रे ।
माया धन न काम का किनार बनाले ।
चार दिन का जीवन, चार दिन की कहानी ।
इतना है मानव समझ , अब तेरी जिंदगानी ।
उसके बाद जाना ही जाना वो आधार बनाले ।
ए काया मिट्टी की ,मोह करना छोड़ दे ।
कबीर जैसे लोगों की ,चादर को ओढ़ले ।
देर करेगा पछतायेगा ,तू विचार बनाले ।
ए तेरा सबेरा है ,सांझ को आना है ।
ए नहीं ठिकाना तेरा, वो तेरा ठिकाना है ।
भटक मत अंधेरा में,चल उजियार बनाले ।
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