स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ती
जिला--- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा---कविता
विषय ---व्यवहार
शीर्षक- व्यवहार शील मानव
मानव को व्यवहार शील, हरपल होना ही चाहिए ।
व्यवहार वह दौलत जिसे,कभी न खोना चाहिए ।
अगर है सद्व्यवहार तो, समझिए दुनियां मुट्ठी में ।
व्यवहार है तो राम आ सकते, टूटी फूटी झोपड़ी में ।
व्यवहार हमारा पीतल नहीं चमकते सोना चाहिए ।
व्यवहार को दुनियां देखती है, व्यवहार की होती पूजा ।
व्यवहार आदरणीय भी सम्माननीय और न होती दूजा।
व्यवहार याद रखें जाते हैं अच्छा व्यवहार बोना चाहिए ।
व्यहार आदमी से अलग और व्यवहार याद रखते है ।
आदमी चला जाता जहां से व्यवहार को सहेजते हैं ।
आदमी को कभी नहीं उसका व्यवहार ढोना चाहिए ।
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