स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर चाम्पा/ छत्तीसगढ़
विधा---आलेख कविता ग़ज़ल
विषय---प्रहरी
शीर्षक---जागते रहो
जागते रहो प्रहरी ने, अभी-अभी कहा है ।
आज तो कुछ बात है,कल तक चुप रहा है ।
प्रहरी को मालूम हो जाता ।
होनी अनहोनी हर घटना ।
बहुत ही आवश्यक हर तरफ ।
प्रहरी का होना और रहना ।
भविष्य वाणी प्रहरी का, आंशिक ही झूठ रहा है।
प्रहरी बनना हर पल ।
जोखीम भरा रहता है ।
प्रहरी मालिक दोनों से पूछा ।
दोनों यही कहते है ।
प्रहरी के अभाव में, हर जगह लूट रहा है ।
प्रहरी खुद जागता है । है
औरों को भी जगाता है ।
धन जन सुरक्षा के दायित्व ।
को वह निभाता है ।
सामने हरदम ईमानदारी का वह सबूत रखा है ।
प्रहरी बने हम हिमालय सा ।
अपने देश के हित में ।
सजगता से दें पहरा ।
पड़े कदम न अहित में ।
प्रहरी के दम पर सुरक्षित हर युग रहा है ।
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