स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा---कविता/ आलेख /ग़ज़ल
विषय ----प्रवाह
शीर्षक ----नदी का प्रवाह
नदी का प्रवाह, बहुत ज्यादा तेज है ।
पार नहीं जा सकता, इसका खेद है ।
पानी में तैरने की,आदत नहीं अपना ।
पार तभी जाऊंगा,दिख जाता रेत है ।
नाव का लेकर सहारा, जाते कई किनारा ।
इस ओर मन कभी, जाएगा नहीं हमारा
बादल सारे छंट जाए , बरसना रुक जाए ।
भागा नहीं जा रहा, अपना जो देश है ।
समय बहुत पास मेरे,सोच भी दूर का ।
वर्षों से आता जाता हूं आज की छोड़ो ।
राह में बाधाएं हैं वह भी मिट जाएगा ।
जिसे पहुंचाना है, सुरक्षित संदेश है ।
नदी की उफनती धार, देख रहे वर्षों बाद है ।
लग रहा दोनों किनारों का हो रहा संवाद है ।
ये स्नेह है ,या कुछ न कहने का मन मुटाव ।
सुनने वाले के मन में उपज रहा अति ठेस है ।
नदी को हम कहें, कैसे अपनी बात ।
उस पार हमें जाना है आ जाएगी रात ।
किसी की उसने कभी भी सुनी कहां है ।
भले ही किसी के उपर कितना कलेश है ।
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