नवापारा खुर्द --सक्ती
जिला--- जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा---कविता मुक्त
विषय-- मां
शीर्षक--मां स्वयं महाकाव्य
मां पर कुछ लिखूं, महाकाव्य बन जाए।
जिसे व्यक्ति सात जन्म ,भी पढ़ न पाए ।
मां की ममता जग में, है गंगा की धार ।
जिसकी छाया में, होता मानव भव पार ।
मां हर दशा में हरपल, कृपा दृष्टि बरसाए ।
मां की आंचल के तले,सौ सौ जन्म का सुख ।
बिना सेवा भाव मिले,छू न पाये कोई दुख ।
मां की ममता जग में, भगवान से बड़ा कहाए ।
मां गुरु होती प्रथम , जीवन की हर सीढ़ी पर ।
रहे साथ न रहे होती,नजर अपनी पीढ़ी पर ।
भक्ति शक्ति सर्वदातृ,जग में मां कहलाए ।
मां अनंत मा की कृपा अनंत,वेद पुराण जिसे गाते ।
जो कलम मां के चरणों में,वही चारो पदारथ पाते ।
आओ मां के चरणों में हम सब शीश झुकाएं ।
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