Monday, July 6, 2020

राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- सावन

काव्य संसद
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प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला  -- राजनांदगांव , छत्तीसगढ़
विषय  -- *सावन आया *
विधा   -- दोहा छंद
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सावन आया है  धरा , हरियाली  चहुँ ओर ।
शीतल  चलती है हवा , वन में  नाचे  मोर ।।

धानी  आँचल ओढ़  के , धरे धरा नव रूप ।
फसल लहर मन मोह ले,सुंदर छटा अनूप।।

अवनी  अंबर  झूमते , खिले चमन में फूल ।
प्रिया मिलन की  है  घड़ी, बूँदे चुभते शूल ।।

रिमझिम सावन है झरे ,भरे नदी जल ताल ।
बरखा छमछम नाचती, कूके कोयल डाल।।

पुलकित जिससे है धरा ,बरखा  है आधार ।
अगणित पुष्पित मंजरी , मेघ करे आभार ।।  

महादेव  की   वंदना , करते  सावन  मास  ।
करे खुशी की कामना ,रखते जन उपवास।।
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*प्रवीण कुमार ठाकुर* 
पतोरा , छुरिया , राजनांदगांव , छत्तीसगढ़ ।
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