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प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगांव , छत्तीसगढ़
विषय -- *सावन आया *
विधा -- दोहा छंद
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सावन आया है धरा , हरियाली चहुँ ओर ।
शीतल चलती है हवा , वन में नाचे मोर ।।
धानी आँचल ओढ़ के , धरे धरा नव रूप ।
फसल लहर मन मोह ले,सुंदर छटा अनूप।।
अवनी अंबर झूमते , खिले चमन में फूल ।
प्रिया मिलन की है घड़ी, बूँदे चुभते शूल ।।
रिमझिम सावन है झरे ,भरे नदी जल ताल ।
बरखा छमछम नाचती, कूके कोयल डाल।।
पुलकित जिससे है धरा ,बरखा है आधार ।
अगणित पुष्पित मंजरी , मेघ करे आभार ।।
महादेव की वंदना , करते सावन मास ।
करे खुशी की कामना ,रखते जन उपवास।।
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*प्रवीण कुमार ठाकुर*
पतोरा , छुरिया , राजनांदगांव , छत्तीसगढ़ ।
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