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रचनाकर -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगांव , छत्तीसगढ़
शीर्षक -- ईमान यहां ठनठन गोपाल
विधा -- तुकांत कविता
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नाम है जिसका धनी लाल ।
करम धरम से है कंगाल ।
ईमान यहाँ ठन ठन गोपाल ।
बेईमान यहाँ है माला माल ।
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आधा तीतर आधा बटेर ।
काल काल का है ये फेर।
जल्दी करो तो होती देर ।
कलयुगी दौर बड़ा अंधेर ।
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नाम बड़े और दर्शन छोटे ।
दुबले पतले अक्ल के मोटे।
कद काठी से नेता छोटे ।
चले खूब और होते खोटे ।
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गोरा बदन है वसन सफेद ।
काले चिट्ठे हैं खुलते भेद ।
वोट डाल सब करते खेद ।
दल दल नेता में है मतभेद ।
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मुँह में राम बगल में छुरी ।
वादा करे ना कभी भी पुरी ।
मिलते ही खुर्शी कर लेते दूरी।
आशा विश्वास है होती अधूरी।
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जहां विश्वास वहां पर धोका ।
ईमान की राह बेमानी ने रोका ।
चाल बुरी किसी ने ना रोका ।
शांत मन जग तेज है झोंका ।
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मेहनत कस सुखते मरते ।
पोंगा पण्डित फलते फूलते ।
आईएएस देखो सेल्यूट करते।
फोकट छाप राज यहाँ करते।
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व्याख्या : -- प्रस्तुत कविता में आधा तीतर
आधा बटेर को अर्थात अनमेल को ध्याय
में रख कर लिखी गयी है ।
यहां पर नेताओं की काली करतूत
को भी , भोली जनता को कैसे वादे कर के
लुटती है दिखाने का प्रयास किया गया है ।
हमारे देश की विडंबना है एक आईएएस
अधिकारी ,ना लायक नेताओं को सेल्यूट
करते हैं ।
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रचानाकार
प्रवीण कुमार ठाकुर
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