Tuesday, June 30, 2020

राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- ईमान

काव्य संसद
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रचनाकर  --  प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला  --  राजनांदगांव , छत्तीसगढ़
शीर्षक  --  ईमान यहां ठनठन गोपाल
विधा    -- तुकांत कविता
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नाम है जिसका  धनी लाल ।
करम  धरम  से  है  कंगाल ।
ईमान यहाँ ठन ठन गोपाल ।
बेईमान यहाँ है माला माल ।
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आधा  तीतर  आधा  बटेर  ।
     काल काल का है ये  फेर।
          जल्दी  करो तो होती देर ।
               कलयुगी दौर बड़ा अंधेर ।        
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               नाम  बड़े  और दर्शन  छोटे ।
          दुबले  पतले अक्ल  के मोटे।
     कद  काठी  से   नेता  छोटे ।
चले  खूब  और  होते  खोटे ।
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गोरा  बदन  है वसन सफेद ।
काले  चिट्ठे  हैं  खुलते  भेद ।
वोट  डाल  सब  करते खेद ।
दल दल  नेता में  है मतभेद ।
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मुँह  में  राम  बगल  में  छुरी ।
     वादा  करे ना  कभी भी पुरी ।
          मिलते ही खुर्शी कर लेते दूरी।
               आशा विश्वास है होती अधूरी।
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               जहां  विश्वास  वहां पर धोका ।
          ईमान की राह बेमानी ने रोका ।
     चाल  बुरी  किसी  ने ना रोका ।
शांत  मन जग तेज  है  झोंका ।
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मेहनत  कस   सुखते  मरते  ।
पोंगा पण्डित फलते  फूलते ।
आईएएस देखो सेल्यूट करते। 
फोकट छाप  राज यहाँ करते।
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व्याख्या : -- प्रस्तुत कविता में आधा  तीतर 
आधा बटेर को अर्थात अनमेल  को  ध्याय
में रख कर लिखी गयी है ।
            यहां पर नेताओं की काली करतूत
को भी , भोली जनता को कैसे वादे कर के
लुटती है दिखाने का  प्रयास किया गया है ।
 हमारे देश की  विडंबना है  एक आईएएस
 अधिकारी ,ना लायक  नेताओं  को  सेल्यूट
करते हैं ।
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रचानाकार  
प्रवीण कुमार ठाकुर

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