Saturday, July 4, 2020

राजनांदगांव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- अंधविश्वास अब मिट रहा है

काव्य संसद
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रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला  -- राजनांदगांव , छत्तीसगढ़
विषय  --  अंधविश्वास अब मिट रहा है
विधा  --  कविता (अनुप्रास अलंकार)
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मिट  रहा  अंधविश्वास   है ,
हर मन  में नव विश्वास है ।
                   हो रहा शिक्षा का प्रसार है ,
                   हो  रहा  ज्ञान का प्रचार है ।
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झाड़ फूक के चक्कर में ,
कितनों ने जान गवाएं हैं।
                  ठग  बाबा  के  झांसे में ,
                  कितनो  ने प्राण लुटाएं ।
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अब   नहीं   औरत  कोई ,
जादू टोने के भेंट चढ़ेंगी ।
                 लांक्षन अगर लगाए कोई,
                 न्याय  की  सीढ़ी  चढ़ेंगी।
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नारी अबला नहीं  सबला  है,
आग में नही  अब जलना है।
               छल में अब नहीं आने वाली,
               ये दुर्गा  काली है  शेरावाली ।
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बिल्ली रास्ता काटे कोई बात नही,
बाँयी आँखे फड़के कोई बात नहीं।
             उल्लू  की  आवाज़ों  से नहीं कोई ,
             आफत नहीं  आती  है नई कोई ।
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कट चुकी हैं अंधविश्वास की बेड़ी ,
शिक्षा की तेज प्रबल तलवारों से।
            घायल नहीं होंगी अब बेटियाँ यहाँ,
            दहेज की कमजोर टकरारों से ।।
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व्याख्या :-- प्रस्तुत कविता में अंधविश्वास पर
प्रहार किया गया है तथा कविता में यत्र तंत्र
अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है ।
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रचनाकार  
प्रवीण कुमार ठाकुर
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