Monday, June 22, 2020

राजनांदगाँव से प्रवीण कुमार ठाकुर की रचना- पग

काव्य संसद 
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रचनाकार  --  प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला  --  राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
शीर्षक   -- धरा धरा पर पग धरे
विधा   --  दोहा (यमक अलंकार का प्रयोग)
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।।1।।
धरा धरा पर पग  धरे  ,  छम छम  बाजे  साज  ।
खग बिन पर उड़ ना सके , पाँव चले पर आज।।
।।2।।
घटा  घिरे  जल  है  गिरे , घटा  जगत  का  ताप ।
प्यास  मिटी  सब जीव की , जीव जंतु  संताप ।।
।।3।।
काल  काल  पर आत है , मरे कोय न अकाल ।
चाल चले  सम  वेग  है ,  रोक  सके  ना  ढा़ल ।।
।।4।।
कर  से  कर  को  लेत  है , स्वप्न   करे  साकार ।
सेवा   सुविधा  है  बढी़  ,  सोंच  लेत  आकार ।।
।।5।।
प्राणघात  मद   पान  है ,  नशा  लेत  है  जान ।
ज्ञान  सही  ये  जान ले , सत्य वचन है  मान ।।

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1 धरा = लड़की का नाम , धरा = पृथ्वी ।
     पर = के ऊपर , पर   = पंख , परन्तु ।
2. घटा  =  मेघ ,  घटा   घटना , कम होना ।
3. काल  =  मृत्यु , काल  =  समय ।
4. कर  =  टेक्स  ,  कर    =   हाथ  ।
5. जान  =  प्राण  ,  जान  =   ज्ञान
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व्याख्या  :---
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दोहा के सम्पुर्ण पर में रचनाकार ने  यमक  अलंकार
 का प्रयोग करते हुये सम्पुर्ण दोहे को अलंकृत  करते
 हुए काव्य की अद्भुत छटा की अभिव्यक्ति दी है ।
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रचनाकार 
प्रवीण कुमार ठाकुर 
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