देवयानी शुक्ला
02. जिला :- रायपुर (छत्तीसगढ़)
03. छंद :- सवैया (उपमा अलंकार)
04. दिनांक :- 11-08-2020
05. रचना का शीर्षक :-
*मोक्ष की लोनी*
रुन-झुन पैंजनी ,
छुन-छुन करधनी ,
केशव के डगमग पगफेरे ।
लाल वैजन्ती की ,
माल सुहावनी ,
सारी धरा को है जैसे घेरे ।
नैन कटार-से ,
बैन मल्हार-से ,
मायाजाल के जैसे चितेरे ।
नंद के लाल की ,
बाल गोपाल की ,
ऐसी छबि है बसी मन मेरे ।।
कृष्ण की वेणु-सी ,
गोकुल की धेनु-सी ,
ब्रज रेणु-सी बना दे विधाता ।
यमुना का तट ,
गोपियों का घट ,
राधा का पनघट दिखा दे विधाता ।
गोप सखा संग ,
मोर पखा रंग ,
मुझको भी रंगवा दे विधाता ।
मोह दुहानी-सा ,
प्रेम मथानी-सा ,
मोक्ष की लोनी चखा दे विधाता ।
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*लोनी = माखन
_उपमा अलंकार_
( सा,सी,से और जैसे लगे सभी पदों में उपमा अलंकार है। )
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