०२. जिला/राज्य :- रायपुर (छत्तीसगढ़)
०३. शीर्षक :-
*मैं भारत हूँ*
०४. विधा :- मुक्तक
*मैं भारत हूँ*
मैं भारत हूँ
माना पीड़ा आपादभाल
शत्रु फैलाए सहस जाल
पर माथा उन्नत ,मन विशाल
हर शौर्य के लिए उद्यत हूँ
मैं भारत हूँ
है ओज का सूरज चमक रहा
गौरव से मुख है दमक रहा
है कठिन भयंकर पथ तो क्या
मेरा प्रयास भी अथक रहा
अपने भुज बल से
अवगत हूँ
मैं भारत हूँ
माना अश्रु हैं भरे हुए
पग में कंटक हैं गड़े हुए
अवरोध कई हैं खड़े हुए
मैं आशाओं का पर्वत हूँ
मैं भारत हूँ
मेरी उन्नत यात्रा जारी है
आशाएँ कभी न हारी हैं
संकल्प के पथ पर चलना है
माना तलवार दुधारी है
मैं जीत के लिए दृढ़मत हूँ
मैं भारत हूँ
मीलों के पत्थर साथ लिए
एक अरब जोड़ियाँ हाथ लिए
संघर्ष के गहन अंधेरे में
हाथों में उज्ज्वल प्रात लिए
मैं नई सदी का स्वागत हूँ
मैं भारत हूँ
एक भोर की लाली बिखर रही
मेरी प्रतिभा दिन दिन निखर रही
कितनी भी बाधाएँ आएँ
मेरी गरिमा सदा ही प्रखर रही
हर परिस्थिति में संयत हूँ
मैं भारत हूँ
अपने अतीत से हूँ गर्वित
और वर्तमान से हूँ ऊर्जित
हूँ दूरदर्शी हूँ सहज सजग
भावी चुनौतियों को सज्जित
जीवन रण में पारंगत हूँ
मैं भारत हूँ
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