देवयानी शुक्ला
02. जिला :- रायपुर (छत्तीसगढ़)
03. छंद :- मुक्त (अनन्वय अलंकार)
04. रचना का शीर्षक :-
*स्वावलंबी भारत*
उठो ! तनिक निज गर्व निहारो ।
निर्भरता की परत उतारो
भारत तुम सम केवल तुम हो ।
अपनी क्षमताओं को संवारो ।
सुई से लेकर चंद्रयान तक ,
पदतालों से नभ उड़ान तक ,
औषधियों से आत्मज्ञान तक ,
हर मोर्चे पर झंडे गाड़ो ।
भारत तुम सम केवल तुम हो ।
अपनी क्षमताओं को संवारो ।
तुम से इस जग में बस तुम हो ।
भारत माता के कुमकुम हो ।
विश्व हाट से क्यों कर गुम हो ?
परदेशी रिपु को ललकारो ।
भारत तुम सम केवल तुम हो ।
अपनी क्षमताओं को संवारो ।।
___________________
अनन्वय अलंकार
*भारत तुम सम केवल तुम हो
*तुम-से इस जग में बस तुम हो
No comments:
Post a Comment