Saturday, September 19, 2020

देवयानी शुक्ला की रचना- राजमार्ग

०१. रचनाकार :- देवयानी शुक्ला
०२. जिला/राज्य :- रायपुर (छत्तीसगढ़) 
०३. विधा :- मुक्त छंद
०४.शीर्षक :- राजमार्ग
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      *राजमार्ग*

मेरे पड़ोस की सड़क 
जो कि राजमार्ग कहलाती है ,
अपनी ही सीमा से लगी
नदी की कलकल
अक्सर सुन नहीं पाती है ‌।

बेचारी सड़क......
सदा रहती है व्यस्त ,
व्यथित ,विह्वल ।
बिजली के तारों पर सजी
पंछियों की चौपाल में
ठहर नहीं पाती दो पल ।

निरख नहीं पाती है 
उस सुंदर दृश्य को नयन भर ,
जिसे निहारते हैं 
कितने ही प्रेमी युगल
उसी की गोद में बैठकर ।

वो तो बेचारी
कर्त्तव्य भार से
हमेशा हांफती रहती है ।
गाड़ियों की फटकार और
टायरों की चिंघाड़ से 
सदा कांपती रहती है ।

जिसे मिलती है 
गालियाँ जन से और 
उपेक्षा तंत्र से ,
वो सड़क परिचित है ,
झूठी दिलासा और 
सच्चे षड़यंत्र से ।

उसकी पथरायी देह
दिन भर सबका भार ढोती है ।
रात में एकाध पहर को
जब कुछ एकांत पाती है ,
तो फफक कर रोती है ।

कहने को तो वो राजमार्ग है ,
पर उसे सुख है न चैन ।
मैं छत से जब मुस्कुरा कर देखती हूँ उसे ,
तो चुरा लेती है नैन ।

अपनी गरिमा के 
विदीर्ण मखमल को
सरकारी टाट से छिपाती है ।
मेरी पड़ोस से गुजरती सड़क....
इस दीनता में भी 
राजमार्ग कहलाती है ‌।
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