Thursday, August 13, 2020

रायपुर से देवयानी शुक्ला की रचना- बंधु अनन्य

०१. रचनाकार :- *देवयानी शुक्ला*
०२. जिला/राज्य :- *रायपुर (छत्तीसगढ़)*
०३. शीर्षक :- *बंधु अनन्य*
०४. विधा :- मुक्तक (असम अलंकार )

*बंधु अनन्य*

रक्त जुड़े संबंध सब,
जब पीछे हट जाएँ |
नेह की डोर से बंधे हुए 
मीत ही साथ निभाएँ ।
मीत ही साथ निभाएँ ,
न इन -सा दूजा कोई ।
इस विधि करें मिताई ,
हो जैसे पूजा कोई ।
बंधु मिले अनन्य ,
कि जैसे जन्मों के अनुबंध ‌
पीछे रह जाएं सारे
रक्त जुड़े संबंध ।।
___________________
*असम अलंकार*

# न इन -सा दूजा कोई

# बंधु मिले अनन्य

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