Thursday, June 11, 2020

छत्तीसगढ़ से सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- मेरे हमसफर

*मेरे हमसफर*
हमसफर मेरे हमसफ़र,साथ है तू हर  डगर।
जब से आई हो तुम,जिंदगी लगे अब बेहतर।
        राह में गर कटंक आए।
      जीवन दुःख से भर जाए।
   पथ में शूल ही शूल बिछ जाए।
   गर जीवन में राह नजर न आए।
चलना तुम साथ मेरे दामन थामकर।
हमसफर मेरे हमसफर..................1.
       हो राहों में गर अंधेरा घना।
       जीवन में हो अवरोध बना।
    गर मुश्किलें हो बहुत ही भारी।
  लड़ते लड़ते बीत जाए उम्र सारी।
हो सफर कैसा भी हो साथ देना तुम उम्र भर।
हमसफर मेरे हमसफर......................2.
तू हमसफर तू हमडगर,तू ही है मेरा हमराज।
तू मेरी अधूरी जिंदगी का,नजर आती है ख्वाब।
कैसे कह दूँ जिंदगी उदास,साथ है तेरा अहसास।
साथ है तू मेरे लगता है अब हर दिन ही खास।
साथ है तू हमदम मेरे,बदल रहा मेरा मुकद्दर।
हमसफर मेरे हमसफ़र..........................3.
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

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