Tuesday, September 8, 2020

सुन्दर लाल डडसेना"मधुर" की रचना- गुरु

कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला- महासमुन्द,( छ.ग.)
शीर्षक- गुरु की महिमा

समर्पण,त्याग,निष्ठा व कर्तव्यबोध की मूर्ति।
राष्ट्र के नौनिहाल का भविष्य की कृति।
सर्वश्रेष्ठ देने का निरंतर अनवरत प्रयास।
है वो महान सरलता व सत्य की प्रतिमूर्ति।1।
जो माता-पिता या संरक्षक तुल्य है।
जो देता हमेशा ज्ञान व जीवन मूल्य है।
शिक्षक कोई व्यवसाय या कर्तव्य नहीं।
वरन ये तो नैतिक दायित्व समतुल्य है।2।
कर देता गुरुवर निज जीवन अर्पण है।
त्याग उनका शिक्षा के लिए समर्पण है।
ज्ञान-विज्ञान का विलक्षण ओजस स्त्रोत।
शिक्षक देश,समाज,परिवेश का दर्पण है।

*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*

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