कवि- सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
शीर्षक- किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-महासमुंद
शीर्षक- किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में
किलकारी ये गूँज उठी है मेरे आँगन में।
शौर्यता का रूप बनी है मेरे आँगन में।
वीरता का गीत बनी है मेरे आँगन में।
किलकारी ये...........
1. जो खाली पन था,हमारे जीवन में।
जो सूनापन था ,मेरे आँगन में।
अब चमकेगा सितारा,अब दमकेगा जो तारा।
मेरे सपनों को,अपनी उड़ान भरने वाली।
मेरे जीवन का जो है बनने वाली है सहारा।
शौर्यता का रूप बनी है मेरे आँगन में।
वीरता का गीत बनी है मेरे आँगन में।
किलकारी ये...........
1. जो खाली पन था,हमारे जीवन में।
जो सूनापन था ,मेरे आँगन में।
अब चमकेगा सितारा,अब दमकेगा जो तारा।
मेरे सपनों को,अपनी उड़ान भरने वाली।
मेरे जीवन का जो है बनने वाली है सहारा।
-सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पोस्ट-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ.ग.)
मोब. ८१०३५३५६५२
९६४४०३५६५२
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com
आज दिनाँक 30.10.2019 को सुबह 4 बजे मेरी बेटी मेरी लक्ष्मी के अवतरण पर लिखी कविता

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