विषय - माँ
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग़.
शीर्षक - माँ
माँ
माँ तो बस माँ है।
ना अच्छी ना बुरी ।
अपने बच्चों के लिए है पूरी।
भगवान की छाया है ।
माँ ही हर रिश्ते की माया है।
माँ तो बस माँ है।
हर दर्द की दवा है।
जन्म हमें दिया है।
नवसृजन का आधार है।
पहला उसका प्यार है।
वो है तो आँचल है।
स्नेह और मोह है।
ममता, दुलार है।
वो पूरा संसार है।
आँसू जो आने ना दे,
बस वो माँ है।
जहाँन से अकेले लड़ ले,
हाँ वो केवल माँ है।
कुछ भी कर जाये बच्चों के लिए,
हाँ वो माँ है।
माँ तो बस माँ है।
सावित्री यादव " सावि "
बिलासपुर छ. ग़.
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