Wednesday, February 3, 2021

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना- इम्तिहान


 विधा -कविता 
 विषय -इम्तिहान 
 रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
 बिलासपुर छ. ग. 
 
 


शीर्षक - इम्तिहान जिंदगी के 

कभी होता ये सपने के। 
कभी लेता  ये  अपने के। 
ये इम्तिहान  ही है जो। 
सबक देता जिंदगी के। 

कभी सोचते ये पाठशाला  के। 
और होते है ये  जिंदगी के। 
हर पल कुछ सीखा  जाती है ये । 
जीवन के पल पल मे इम्तिहान  लेती है। 


जीना मुश्किल कर देती है। 
रंग नया  भर देती है। 
ये  सिखाती जीवन के फलसफे। 
ये ऐसा पाठ पढ़ाती  है। 
ये  कड़वे  सत्य है जीवन के। 

सागर होता है सपनो का। 
लहरे इनकी परीक्षा। 
हलात ऐसे  होते  है । 
सच्चे  झूठे  सपनो  के। 

कभी होते अपने अपनों से दूर । 
कभी होते ये  बहुत मजबूर। 
ये जीवन बढ़ा अजीब है। 
होते पल पल नसीब के। 
सारे फैसले बिना क़ोई गणित  के। 

ये  इम्तिहान  है जिंदगी  के। 
ये इम्तिहान है  जिंदगी के। 

रचनाकार _सावित्री  यादव "सावि "
बिलासपुर  छ. ग. 

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