विषय चंदन
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग़.
शीर्षक -चन्दन जैसा हो गुण
चंदन जैसा हो गुण ,
जिससे महके घर आँगन।
जिस पर लिपटा रहता,
विषधर पर ना लेता उसका गुण।
अपनी विचार आहार सदा ही,
सात्विक रखना जिससे मिले
मान - सम्मान।
परिवार मे व्यवहार ऐसा की,
शीतल हो सबका मन।
भगवांन के माथे पर लगकर,
जीवन सफल हो जाता है चिता
की लकड़ी सजकर।
अंतिम सत्य का कराता भान,
ऐसा होता चंदन का गुण।
सुंदरता के उपाय का,
कारक बन जाता है।
बढ़ाता हमेशा सुंदरता की शान,
चंदन लगकर बढ़ाता माथे का मान।
चरित्र ऐसा हो चन्दन के,
जैसे खुशबु बिखरे चारो ओर,
जिससे खुशियाँ बरसे दिन और रैन।
चंदन जैसा हो गुण।
रचनाकार- सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग़.
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