Tuesday, June 16, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- दीवारों के कान

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
कविता
शीर्षक - दीवारों के भी कान होते है।

ना उदास ना निराश करो मन को, जिंदगी मिली है तो, जिंदादिली से जियो।
सब कहते हैं चांद सा मुखड़ा तेरा, ख्वाब बुना मैंने,सोचा सजते सवरते रहो।
मुंह की खानी पड़ती है अक्सर उन्हें,
अपने मुंह मियां मिट्ठू ना हमेशा  बने रहो।
हर वक्त बजता रहा,कानों में युद्ध का बिगुल,
जाने कब कुच कर जाना हो तैयारी रखो।'
'मुंह में राम बगल में छुरी' इनसे रहिए  सावधान,
'दीवारों के भी कान होते हैं', खुद को समझाते रहो।
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बनती है,
जिंदा रहना है तो तकदीर को आजमाते रहो।

माधवी गणवीर

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...