जिला - राजनादगांव
विधा - मुक्त छंद
शीर्षक - *तुम्हारा साथ*
तुम्हारा साथ,
महज साथ नहीं,
जीवन जीने का आभास है,
तुम्हारा साथ,
महज साथ नहीं,
आत्मविश्वास से भरा,
सफलता का नाद है।
तुम्हारा सानिध्य,
महज सानिध्य नहीं,
एक तेज,, एक ओज़ से पूर्ण
विरक्त मन की पूर्णता है।
तुम्हारा स्नेह,
महज स्नेह नहीं,
कामयाब जिंदगी का
हसी मुकाम है।
तुम्हारी चौखट,
महज चौखट
वो जन्नत है,
जहा मै से हमारा का
स्वाभिमान पूर्ण हुआ।
अब भला कोन है जो न दे
तुम्हे अपना मौन समर्पण।
माधवी गणवीर
राजनादगांव
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