जिला - राजनादगांव
शीर्षक - आत्मनिर्भर
जीना है गर जी भर,
तो रहो हमेशा आत्मनिर्भर,
खुद के पैर जमाए रखो,
ना हो दूसरों पर निर्भर।
देश हो या हो समाज,
कृषि हो या कौशल विकास,
तकनीकी हो,या सूचना,
विस्तार हर क्षेत्र में है खुला आकाश।
स्वर्णिम भारत का है आधार,
विकसित हो भारत सरकार,
संकल्प हमारा, लक्ष्य हमारा,
कहीं तो सपने लेगा आकार।
देश की मिट्टी मेरा अभिमान,
आत्म निर्भरता से राहें आसान,
असंभव को भी संभव कर दे,
कर्तव्यनिष्ठता है हमारी शान।
देश की विकट परिस्थिति में,
क्यों ना शपथ ले हम आज,
आत्मनिर्भर होकर करे
हम राष्ट्रहित में करे सार्थक काज।
माधवी गणवीर
राजनादगांव
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