Thursday, May 14, 2020

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से माधवी गणवीर की रचना- भूख

नाम - माधवी गणवीर
जिला - राजनादगांव
शीर्षक - *भूख*
 

ये भूख की ज्वाला भी क्या क्या नहीं कराती है,
अच्छे भले आदमी को हैवान बना देती हैं।
हर तरफ मची है जंग,दो वक्त के रोटी को
आदमी घर से बेघर हुए दो वक्त की रोटी को।
पेट की ज्वाला फूटे तो, नहीं होता मान अपमान,
बस दो निवाले की जुगत का ही होता सबको भान।
कोई कानून ऐसा क्यों नहीं बनता साहेब,
 उठे तो भूखे हो पर कोई भूखे ना सोने पाए साहेब।
कितने चमत्कारी बाबाओं ने धूल से फूल बना डाले,
पेट की ज्वाला मिटे ऎसे मंत्र क्यो नहीं बनते। 
शर्मसार हो रहा आईना, देख जिंदगी का सच,
कुत्ते और भूखे बच्चे एक ही पत्तल में झपटे तब।
चिराग कभी तो भूख की मजार पर जलाओ,
भूख के विरुद्ध कोई ठोस कदम तो उठाओ।
माधवी गणवीर

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