जिला-महासमुंद
विषय-प्रहरी
शीर्षक-वीर जवान
★★★
रक्षक जो निज देश के,अपने वीर जवान है।
उनके ही बल से हमें,होता अभिमान है।।
हाथों में बंदूक,सीने में अंगार है।
दुश्मन कोई जब दिखे,करता वार अचूक है।।
निज मन में विश्वास भर,माथे पर ले ओज है।
सीमा पर रक्षा करें,अपने सैनिक रोज है।।
निज परिजन से दूर रह,रखे देश के मान को।
अपने वीर जवान,सहकर सब कष्ट को,।।
रक्षा खातिर देश की,दे दी जिसने जान को।
उन वीरों का प्रेम तुम,कर लेना सम्मान उनको।।
प्रेमचन्द साव"प्रेम",बसना
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