Tuesday, March 23, 2021

एक दोहा धरा पर - प्रेमचन्द साव "प्रेम"


रचनाकार-प्रेमचन्द साव "प्रेम"
जिला-महासमुंद
विधा-दोहा
विषय-धरा
शीर्षक-धरती
★★★

सराबोर  सुख  से हुआ , अपना  मन  आकाश।
धरती  भी  सुरभित  हुई , पाकर  सूर्य प्रकाश।।

फैल गई उजली किरण,सुरभित सब तृण पात।
प्रखर  सूर्य  के  संग  में , आया   पुण्य  प्रभात।।

मन   वीणा   के   तार   में , उठने   लगी  तरंग।
जब फैली स्वर्णिम किरण,शुभ प्रभात के संग।।

लगे  चहकने  खग  सभी , अलि करता गुंजार।
सूर्य  किरण  पाकर हुआ,जब सुरभित संसार।।

फेंक  रहा  धरती  सुरभ, मोह  जाल  का  पाश।
प्रखर  सूर्य ने  जब किया, अंधकार  का  नाश।।

जब-जब  सूरज  ने किया, धरती  को  आलोक।
अंधकार  के  संग  में ,मिटा  तमस  घन  शोक।।

स्वर्ण  किरण  की  लालिमा , जैसे   पावन  हेम।
सूर्य  ओज  मन  में भरो ,उठ प्रभात  में  *प्रेम*।।

*प्रेमचन्द साव "प्रेम",बसना*

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...