स्थान-बसना
विधा-दोहा
विषय:-धनतेरस
*धनतेरस*
धनतेरस के पर्व में,माँ लक्ष्मी का वास।
और दीप की आवली,मन भरता विश्वास।।
गूँज रहा मन बाग में,दीवाली का शोर।
धनतेरस के पर्व में,खुशियाँ है चहुँओर।।
शुभ लाभ करता सदा,शुभता का संचार।
धनतेरस के पर्व में,बाँट-बाँटकर प्यार।।
द्वारों पर सजने लगे,सुंदर वंदनवार।
धनतेरस के पर्व में,दीप करे उजियार।।
कलुष तमस का नाश हो,मिले झूठ को हार।
धनतेरस के दीप से,मिलता है सुखसार।।
प्रेमचन्द साव "प्रेम"
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