बैकुंठपुर,जिला_कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_संस्कार पे प्रहार
समय कह रहा है
सुनो ,दौड़ रहे हो ना
आधुनिकता की दौड़ में
शामिल हो रहे हो
फैशन के होड़ में
भुला कर अपनी संस्कृति
अपना सम्मान
कर रहे हो पश्चमिकरण
का गुणगान
चाहे भाषा हो या व्यवहार
सबमें लिए इनको उतार
पहनावा भी इन्हीं के भाते
अपने सारे अंग दिखाते
न करो ऐसे तुम स्वयं पे अत्याचार
भूलकर अपना अस्तित्व
न करो अपने संस्कार पे प्रहार....
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
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