बैकुंठपुर,जिला _कोरिया छत्तीसगढ।
शीर्षक_सावन की सौगात
सावन की सौगात
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात
कब से सावन सूखा था
बस तरस तरस के रहता था
लो बन गई बात
आ गई बरसात
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात।
छाई फिर से देखो
धरा पर हरियाली छाई
देखो किसानों के मुख पे
खुशियां मुसकाई
संग झुमों सब मिलकर
चाहे हो न हो मुलाकात
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात।
शिव जी की महिमा
शिव जी का महीना
श्रावण सोमवार
लाया व्रत और त्यौहार
सभी जीवों पर प्रसन्न हैं
होते सभी के भोलेनाथ
बड़े दिनों के बाद
मिली सावन की सौगात।
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
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