तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला_कोरिया,छत्तीसगढ़
विषय_मां
शीर्षक_आपकी मां
विधा_कविता (मुक्तक)
ओ मेरे प्यारे बच्चे,
नन्हें नन्हें दुलारे बच्चे
मैं कितना प्यार, दुलार
आपसे करती हूं।
पर, शिकायत
मुझे खुद से है कि
गुस्सा भी हद से ज्यादा
आप पर मैं करती हूं
सब लाड प्यार, न जाने
कहां खो जाता है?
जब आपकी मां को
गुस्सा आ जाता है
नहीं सकोच करती
हांथ छोड़ने में, दंड भरपूर
दिया करती है,
कभी डांट, फटकार
कभी कानों को ऐंठन
जोरों की देती है
पर सच कहूं आपकी मां
आपसे बहुत प्यार करती है
नहीं चाहती वह कि
कल गैरों के बीच हंसी का पात्र बनो
बेवजह, किसी झगड़े का
सरताज बनो
इसलिए तो रोका करती है
एक मां अपने बच्चे को
गलत करते हुए
माना कि बदमाशियां हैं
और थोड़ी शरारत भी
जायज है आपकी
मेरे लाल, आपकी मां को
बड़ी फिक्र है आपकी
नहीं चाहती मां कि
मेरे अलावा कोई और आपको
कुछ कहे, गर ऐसा हो
तो भला मां कैसे सहे?
सभी अच्छी बातों को सीख
समझ उतारो व्यवहार में
संस्कारों को भूलो नहीं
अति लाड दुलार में
असीम सुख की प्राप्ति
और निश्चिंतता होती है
मातृत्व की छांव में
सोने के बाद भी करती है
मां मालिश, बच्चों के पांव में
पहले मारती हूं फिर
बहुत पछताती हूं, प्यार से
सिर को सहलाती हूं
कैसे कहूं मेरे बच्चों
मैं आपसे कितना प्यार करती हूं?
भले ही डांटती हूं पर
बच्चों पर ही जान छिड़कती हूं
मेरे बच्चों, मैं आपसे
बहुत बहुत बहुत प्यार करती हूं
बस यही समझाना चाहती हैं..
आपकी "मां"
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
Friday, October 16, 2020
कोरिया से तारा पांडेय"मुक्तांशा" की रचना- माँ
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