बैकुंठपुर, जिला कोरिया छत्तीसगढ़।
विषय_पर्यावरण
शीर्षक_आओ लें संकल्प महान
कब से हैं हम,
जानते हुए अनजान
क्यूं नहीं समझ पाते
भाषा बेजुबान?
भगवान ने बनाया
हमे इंसान, करने को
और जीवों का कल्याण
पर मनुज नहीं समझ पाया
अपने कर्तव्यों को
भूल बैठा अपने दायित्वों को
करता चला स्वयं
प्रकृति का संहार
जीवों को आहार बनाया
बड़े चाव से उनको खाया
काटे उसने वन और उपवन
खूब किया प्रकृति का दोहन
कारखानों से शहर बसाया
प्रदूषण उसने खूब फैलाया
चाहे हो जल, वायु या ध्वनि
नहीं की किसी में भी कमी
सभी को बहुत प्रदूषित किया
इतना ही नहीं उसने मानवता
मानवता को भी शर्मसार किया
नहीं छोड़े कोई कुकर्म
अपराधों में व्यापार किया
रिश्ते नाते भूल,
संस्कारों को धूल चटाया
करता ज्ञान की बातें पर
पर नहीं उसको तनिक भी ज्ञान
जिस धरती पे रहना उसको
करता उसी को लहूलुहान
कट जाएंगे जो वृक्ष सारे
पर्यावरण कैसे अस्तित्व सम्हाले
सूखने लगे नदी, नाले
अगली पीढ़ी को छोड़ें
किसके हवाले?
प्रकृति तो संतुलन खुद करेगी
शायद कोरोना महामारी से
ही इंसाफ करेगी
आ गया समय अब
चलो अपनी सुध लें जान
बहुत गलतियां हुई हमसे
अब माफी लें मांग
हरित धरा फिर से, लहलहाएगी
वन्य जीवों का बसेरा भी बसेगा
अब ना कोई पेड़ कटेगा
खेतों पर हल चलेगा
अब सभी अपने जिम्मेदारी
जल्द ही लेंगे पहचान
आओ लें संकल्प महान।
तारा पांडेय"मुक्तांशा"
No comments:
Post a Comment