बैकुंठपुर,जिला_कोरिया
छत्तीसगढ।
शीर्षक_अपने अयोध्या धाम
कब से नयन थे तरशे
ओ प्रभू श्री राम
अब स्वप्न पूरा होगा
जब आएंगे,आप
आओ पधारो, श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।
महीने बीते, बरस भी बीते
मंदिर के निर्माण को लेकर
जाने कैसे दिन हैं बीते
अपने ही जन्मभूमी पे
आने में कैसे, लम्बे क्षण हैं बीते
कैसे कहें प्रभू,भक्तों का
कैसे जीवन है बीते
अब जाकर मिले हृदय को आराम
आओ पधारो, श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।
पहले पहल गुरुकुल जाना
तत्पश्चात,वनवास बिताना
ओ मेरी भगवान
पुनः वीयोग सहे श्रीराम
त्यागा सीता मां को
कैसे पूर्ण रहें सिय बिन राम
पुत्र मिलाप से अश्रु छलके
खुशियों के पल थे महके
अब आ मिलेंगे पुनः सियाराम
पर विचारों के द्वंद्व में
स्वयं को सिद्ध करते करते
माता चली मुक्तिधाम
प्रार्थना है,वंदना है,निवेदन
इतनी कि अब ना कोई
परीक्षा होगी,अब केवल
आप सभी के आने की प्रतीक्षा होगी
सुनो मेरे भगवान
आओ पधारो,श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।
मन में उमंगें,हिलोर मारें
गूंजें चहुं ओर,श्रीराम के नारे
कैसे कोई कुछ और बिचारे
अन्तर्मन बस तुम्हें ही पुकारे
सुन लो पुकार मेरे राम
आओ पधारो,श्रीराम
अपने अयोध्या धाम।
तारा पांडेय "मुक्तांशा"
No comments:
Post a Comment