Friday, January 31, 2020

स्वच्छ भारत अभियान: व्यापक अध्ययन/ संदीप सिंधवाल

लेखक - संदीप सिंधवाल 
शीर्षक - स्वच्छ भारत अभियान: व्यापक अध्ययन
राज्य - रुद्रप्रयाग उत्तराखंड 


एक कदम स्वच्छता की ओर के नारे से स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है। भारत सरकार द्वारा चलाई गई इस राष्ट्रीय स्तर के अभियान में शौचालयों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, गलियों व सड़कों की सफाई, देश के बुनियादी ढांचे को बदलना आदि शामिल है। इस अभियान को आधिकारिक तौर पर राजघाट, नई दिल्ली में 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 145 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने देश के 11 महत्वपूर्ण एवं प्रभावी लोगों कोई इसका प्रचार प्रसार करने के लिए चुना गया था जिन्होंने इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
यह राजनीतिक आयामों से पृथक देश भक्ति से प्रेरित है। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक कर्तव्य है और इस देश को स्वच्छ देश बनाने के लिए हर भारतीय नागरिक की भागीदारी की आवश्यकता है| इस अभियान को सफल बनाने के लिए विश्व स्तर पर लोगों ने पहल की है। शिक्षक और स्कूल के छात्र इसमें पूर्ण उत्साह और उल्लास के साथ शामिल हो रहे है और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को सफल बनाने का प्रयास किए गए जी अत्यंत ही सराहनीय रहे हैं।
सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सूत्रधार में जोड़ते इस  अभियान को सफल बनाने के लिए स्वयं मोदी जी ने सड़कों पर साफ सफाई की थी। यथाशीघ्र ही उनकी इस मुहिम से प्रेरित होकर लोगों में साफ सफाई के प्रति नया उत्साह पैदा हो गया और लोगों ने साफ सफाई भी करना चालू कर दिया है। देश के हर प्रांत में सार्वजनिक शौचालयों को बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, बाजार आदि जगहों पर उपलब्धता कराया गया जो कि अभी भी जारी है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को पांच वर्षों के अंदर पूरा करने की योजना थी जो कि लगभग अपना लक्ष्य प्राप्त करती दिखी है और इसी लक्ष्य की प्राप्ति से ही अधिकांश लोग मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे। शहरी क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रवृति को जड़ से हटाना, अस्वास्थ्यकर शौचालयों को पानी से बहाने वाले शौचालयों में परिवर्तित करना, खुले हाथों से साफ-सफाई की प्रवृति को हटाना, लोगों की सोच में परिवर्तन लाना और ठोस कचरे का प्रबंधन करना आदि लक्ष्य बखूबी पार किए गए।
हालांकि इस अभियान का एक नकारात्मक पहलू ये भी रहा है कि लोग हाथ में झाड़ू लेती तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं और खूब वाहवाही बटोरी जाती है। स्वच्छता की इन तस्वीरों को फैलने के  इस क्रम में सबसे आगे नेता लोगरहे है। वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं की तस्वीरे भी देखी जाती है जो कार्य के जमीनी स्तर से जुड़े रहते है।
ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के लिए इससे पहले भारतीय सरकार द्वारा निर्मल भारत अभियान की स्थापना की गई थी लेकिन अब इस समय इसका पुनर्गठन स्वच्छ भारत अभियान के रूप में किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को खुले में शौच करने की मजबूरी से रोकना, इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने 11 करोड़, 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख करोड़ रुपए की राशी को खर्च करने की योजना बनाई गई थी। सरकार ने कचरे को जैविक खाद और इस्तेमाल करने लायक ऊर्जा में परिवर्तित करने की योजना भी बनाई थी। इसमें ग्राम पंचायत, जिला परिषद, पंचायत समिति की बहुत अच्छी भागीदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए इसे चलाया गया है।
संक्षिप्त रूप से कहना चाहूंगा कि इस अभियान की आवश्यकता क्यों पड़ी? देश भर में कोई भी ऐसा स्थान नहीं है जहां पर कूड़ा करकट नहीं फैला हो। हमारे भारत देश के हर शहर, हर गांव, हर एक मोहल्ला, हर एक गली कूड़े-करकट और गंदगी से भरी पड़ी है।हमारे देश के गाँवो में शौचालय नहीं होने के कारण के लोग आज भी खुले में शौच करने जाते थे जिसके कारण हर जगह गंदगी फैलती थी और यह गंदगी नई बीमारियों को आमंत्रण देती है। विशेषतः पर्यटक स्थलों पर फैले भारी कूड़ा करकट और गंदगी के कारण विदेश से लोग हमारे देश में आना कम ही पसंद करते थे, जिसके कारण हमारे देश को आर्थिक नुकसान होता है। इसी कचरे में बहुत ही खतरनाक रसायन के अवशेष भी होते हैं जिसके कारण हमारे साथ-साथ अन्य जीव जंतुओं को भी नुकसान होता है और साथ ही हमारी पृथ्वी भी प्रदूषित होती है। नगर निगम के कचरे का पुनर्चक्रण और दुबारा इस्तेमाल, सुरक्षित समापन, वैज्ञानिक तरीके से मल प्रबंधन को लागू करने की भी नितांत आवश्कता थी। विश्व भर में आधुनिकता की दौड़ में इसी अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में वैश्विक जागरुकता का निर्माण करने के लिये और सामान्य लोगों को स्वास्थ्य से जोड़ना जरूरी था। एक स्वच्छता ही सकारात्मक मानसिकता लती है।
अंत में, इस अभियान को सफल बनाने में नागरिकों का एवम् इससे जुड़ी संस्थाओं का अतुल्य योगदान रहा है। हमे इस अभियान को ऐसे ही सुचारू रूप से निरंतर जारी रखने की जरूरत है जिससे हर भारतवासी की यह एक आदत और एक फ़र्ज़ 
बन सके। 

संदीप सिंधवाल

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...