Friday, January 31, 2020

स्वच्छ भारत अभियान-व्यापक अध्ययन / नलिनी बाजपेयी

निबन्ध -सृजन 
निबन्ध लेखिका-नलिनी
                   बाजपेयी
विषय-स्वच्छ भारत अभियान-व्यापक अध्ययन
राज्य-छत्तीसगढ़


"स्वच्छता है एक बड़ा अभियान,
आप भी दे अपना योगदान।"
प्रस्तावना- स्वच्छता  भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन है।जो पूर्णतः स्वच्छता पर आधारित है।जिसके तहत गलियों,सड़कों तथा अधो संरचना को साफ सूथरा और कूड़ा साफ रखना है।यह अभियान 2अक्टूबर 2014 से पूरे देश में लागू किया गया।कुछ प्रमुख लोगों को प्रमुख दायित्व दिया गया।विश्वस्तर पर लोगों ने 
इसकी सराहना भी की है 

गांधीजी का स्वप्न-देश को आजाद कराने में गांधी जी अहम भूमिका थी।स्वच्छ भारत उनके सपनों के भारत का एक हिस्सा था।वो अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबन्धी शिक्षा देने का काम करते रहे।गाँधी जी के सपनों को साकार करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान और 'एक कदम स्वच्छता की ओर' जैसे बातों ने धूम मचा दी है।

पृष्ठभूमि-स्वच्छता अभियान का आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल1999से भारत सरकार ने व्यापक ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया।उसके बाद में 1 अप्रैल 2012 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा "निर्मल भारत अभियान" चलाया गया।उसके बाद 24 सितम्बर 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी से फिर से इस कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया,और महात्मा गांधी जी की 150 वीं वर्षगाँठ तक खुले में शौचमुक्त भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

प्रधानमंत्री का प्रयास-प्रधान मंत्री जी का स्वच्छता पर चलाया गया कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय एवं प्रशंसनीय है।उन्होंने शौचालयों की जरूरत एवं महिलाओं की समस्याओं के बारे में खुलकर बताया।स्वंय झाड़ू लेकर सफाई अभियान में लग गए।इसी व्यवस्था के तहत कईं पत्र परिपत्र जारी किया गया -जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, राष्ट्र व्यापी स्वच्छता अभियान,अस्वच्छ शौचालयों की पहचान, और उनको स्वच्छ शौचालयों में उनका रूपांतरण करना,आदि कार्य किया गया।लोगों को पुरस्कृत किया गया।
खड़गपुर के जैव  शौचालय को स्वच्छ भारत पुरुस्कार 2018 प्राप्त हुआ।झारखंड को सबसे ज्यादा स्वच्छ राज्य घोषित करना।
मध्यप्रदेश का इंदौर को दो बार स्वच्छ नगर का दर्जा मिला।
योजना के प्रकार-
       इस योजना को ग्रामीण एवं शहरी  योजनाओं में बांटा गया।
ग्रामीण योजना-इस योजना के द्वारा गांवों में स्वच्छता संबन्धी आदतों को बेहतर बनाना,स्वसुविधाओं की मांग करना जिससे जीवन स्तर बेहतर बनाया जा सके।सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 1.96  लाख करोड़ की अनुमानित लागत के 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौचमुक्त भारत बनाने के लिए  हर घर में शौचालय निर्माण,प्रौद्योगिकी का उपयोग कर कचरे को पूँजीरूप देते हुए जैव उर्वरक और ऊर्जा के रूप में परिणित करने का निर्णय लिया गया।

शहरी क्षेत्र-इस मिशन का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्ष्य बना कर2.5 लाख सामुदायिक शौचालय और प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबन्ध की सुविधा प्रदान की गई। आवासीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों एवं सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना।पर्यटनस्थलों,बाजारों, स्टेशनों,जैसे जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।यह पांच वर्षो की अवधि में 440 शहरों में लागू किया जाएगा।
आज की स्थिति-शासन द्वारा इतना करने के बाद भी आज भी जमीनी सच्चाई कुछ और कहती है।कई लोग दिखावे के लिए इसमें भाग लेते है।
      स्वच्छता बहुत अच्छी चीज है।इससे बीमारियों से बचत होगी।विश्व में देश की छवि अच्छी होगी।

 निष्कर्ष-अब समय आ गया है कि हम इस कार्यक्रम में तनमन धन से योगदान दे। ये हमारा नैतिक कर्तव्य है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाय।समाज की सहभागिता बढ़ाई जाए।वैसे भी समाज के साथ स्कूल ,शिक्षकों ,और छात्रों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस पर प्रयास किया जा रहा है।देश भर के पंचायतों और उनकी समितियों को और बढ़ाया जाए।निश्चित रूप भारत स्वच्छ भारत बनेगा।स्वच्छता हमारी पहचान बनेगी।
  
     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

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