लेखिका नलिनी बाजपेयी
राज्य -छत्तीसगढ़।
निबन्ध सृजन क्रमांक-01
आज का विषय-"नागरिकता (संशोधन )अधिनियम,2019''
रूपरेखा-
प्रस्तावना
अधिनियम की संक्षिप्त जानकारी
अधिनियम की भ्रांतियां
लाभ
हानि
निष्कर्ष
प्रस्तावना-
भारत देश का स्वर्णिम इतिहास हमेशा बताता है कि हम अतीत काल से ही शरणागतों की रक्षा करते रहे है।चाहे विभीषण हो,चाहे दलाईलामा।हमने हमेशा शोषित पीड़ित लोगों की रक्षा की है।हमारे देश में बंगला देश से आए शरणार्थी भी इसका ज्वंलत उदाहरण है।
अधिनियम की संक्षिप्त जानकारी-यह अधिनियम भारत की संसद द्वारा पारित ऐसा अधिनियम है जिसके तहत सन1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गई है कि31 दिसम्बर सन 2014 के पहले पाकिस्तान, बंगला देश,अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिक्ख,जैन पारसी,एवं ईसाइयों को धार्मिक प्रताडना के कारण भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकेगी।
पाकिस्तान, बंगलादेश,अफगानिस्तान, आदि मुस्लिम बहुल राष्ट्रों में गैर मुस्लिमों को उत्पीड़ित किया जाता है।उनको अपनी पूजा पद्धति एवं आस्था को लेकर प्रताड़ित होना पड़ता है और तक हार कर मौत को गले लगाना पड़ता है,धर्मांतरण करना पड़ता है ।यहीं कारण है कि उपरोक्त राष्ट्र कभी हिन्दू भूल हुआ करता था वहां हिन्दू नगण्य होते जा रहे है।कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की व्यथा किसी से नहीं छिपी हैं।उन्हें बेइज्जत किया गया।उनकी संपत्ति छीन ली गई।तरह-तरह की नारकीय यातनाएं दी गई।आज कश्मीर मुस्लिम बहुल प्रदेश बन गया।
मुस्लिम राष्ट्रों से सताए बहिष्कृत लोगों का भारत अतीत काल से शरण स्थली मन जाता है।"अतिथि देवीभवः''एवं "वसुधैव कुटुम्बकम''की भावना से भरा भारत देश इन आदर्शों के पालन के नाम से मिसाल के रूप में जाना जाता है।
यह अधिनियम जुलाई 2016 को पहली बार प्रस्तुत किया गया था,समिति ने इसकी रिपोर्ट 1 जनवरी 19 को पेश की।इसे भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 9 दिसम्बर को प्रस्तुत किया गया और उसी दिन देर रात को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया।10 दिसम्बर को इसका प्रथम द्वितीय एवं तृतीय पाठन किया गया।दूसरे दिन राज्य सभा में इसके पक्ष में 125 और विपक्ष में 99 मत पड़े।12 दिसम्बर को राष्ट्रपति के पास अनुमति के लिए गया और उसी दिन राष्ट्रपति का हस्ताक्षर हो गया।
अधिनियम को लेकर भ्रांतियां-कुछ लोगों का कहना है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम देश हित में है,वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में जबरदस्त आंदोलन,हिंसा, तोड़फोड़,के साथ सार्वजनिक चीजों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।जबकि "हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकता।
नागरिकता संशोधन अधिनियम सी.ए.ए. जिसे 12 दिसंबर को कानून बनाया गया और एक राष्ट्र व्यापी नागरिक रजिस्टर एन. आर. जी.. बनाने के प्रस्तावों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ही एक श्रृंखला है।इसके विरोध में असम,दिल्ली,मेघालय अरुणाचल ,त्रिपुरा आदि प्रदेशों में हिंशक आन्दोलन हो रहे हैं।अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दिल्ली के जे एन यू ,जामिया यूनिवर्सिटी के साथ साथ पूरे देश में फैल गया है हालाकि प्रदर्शन करियों की चिन्तायें और विचार अलग अलग है।
यहां लोकतंत्र है सरकार अपना काम कर रही है।विरोध लोगों का अधिकार है।विरोध को देखते हुए शीत कालीन सत्र में नागरिक संशोधन बिल को संसद में एक बार फिर से पेश किया जायेगा।लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।राजनीतिक दलों के का आरोप है कि गृह मंत्री ने बैठक बुलाकर भरोसे में लेने की बात कही थी ,मगर ये सब कुछ नहीं हुआ।अतः कलाकार लेखक बुद्धिजीवी सभी अलग अलग ढंग से विरोध कर रहे हैं।
कुछ बनाने के प्रस्तावों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ही एक श्रृंखला है।इसके विरोध में असम,दिल्ली,मेघालय अरुणाचल ,त्रिपुरा आदि प्रदेशों में हिंसक आन्दोलन हो रहे हैं।अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी दिल्ली के जे एन यू ,जामिया यूनिवर्सिटी के साथ साथ पूरे देश में फैल गया है हालाकि प्रदर्शन करियों की चिन्तायें औरआ विचार अलग अलग है।
यहां लोकतंत्र है सरकार अपना काम कर रही है।विरोध लोगों का अधिकार है।विरोध को देखते हुए शीत कालीन सत्र में नागरिक संशोधन बिल को संसद में एक बार फिर से पेश किया जायेगा।लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।राजनीतिक दलों के का आरोप है कि गृह मंत्री ने बैठक बुलाकर भरोसे में लेने की बात कही थी ,मगर ये सब कुछ नहीं हुआ।अतः कलाकार लेखक बुद्धिजीवी सभी अलग अलग ढंग से विरोध कर रहे हैं।
इस अधिनियम के तहत अवैध विदेशों को पहचान कर वापस भेजना है जिसमें ज्यादातर मुसलमान हैं। 31 दिसंबर 2014 एन आर सी के जरिए जुलाई1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों को पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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अधिनियम की भ्रांतियां-
पूर्वोत्तर राज्यों के स्वदेशी लोगों का एक वर्ग फरा हुआ है,उन्हें डर है कि बिल पास होने पर शरणार्थियों को नागरिकता मिल जाएगी और उनकी अपनी पहचान, संस्कृति, खतरे में पड़ जाएगी।उन्हें डर है कि जैसे कांग्रेस पार्टी ने बंगला देश के नागरिकों को सुरक्षा देने के नाम पर आई.एम.डी.टी.कानून थोपा वैसे ही बी.जे. पी.अवैध बंगलादेशी लोगों की सुरक्षा के नाम पर नागरिकता संशोधन बिल लाएगी और असमिया अल्पसंख्यक हो जाएंगे।राजनीतिक धुर्वीकरण होगा।क्षेत्रीय मुद्दों की अहमियत खत्म हो जाएगी।इस अधिनियम में दस्तावेज नहीं होने पर भी नागरिकता दी जाएगी,हांलाकि यह प्रस्ताव राज्य सभा मे पारित ना हो सका।
लाभ--इस बिल से भौतिक लाभ तो नहीं के समान दिखता है क्योंकि जो भारतीय है उनके लिए ये है ही नहीं,मानसिक लाभ जरूर महसूस कर सकते है
मानसिक लाभ के अंतर्गत हम मांगने वाले नहीं बल्कि देने वाले है।वतन के प्रति सम्मान की भावना बढ़ेगी।दूसरों को खुश देखकर मानसिक शान्ति मिलेगी।
सरकार के अनुसार अप्रवासियों को सम्मान देना और नागरिकता प्रदान करना है,ना कि किसी विशेष समुदाय को हानि पहुँचाना है और न उनके प्रति हीन भावना प्रकट करना है।
हानि - -इस अधिनियम से सबसे ज्यादा जनसंख्या पर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि हमारे देश की जनसंख्या पहले ही बढ़ी हुई है।अनावश्यक खर्च भी बढ़ेगा।नागरिक बनने के बाद कानूनी रूप से देश की हर चीजों का उपभोग करेंगे।सरकारी नौकरी में भाग लेंगे जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। तोड़-फोड़ और हिंसा से आम जनता वैसे भी प्रभावित हो रही है।
निष्कर्ष --कुल मिलाकर यह अधिनियम कुछ अच्छा तो कुछ दोष युक्त भी है।कुछ लोगों के द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। इस अधिनियम में यहां रहने की 11 वर्ष की पाबंदी भी हटा कर 5 वर्ष कर दी गई है।
अब तो शंका समाधान के लिए अधिनियम के समर्थन में रैलियां ,सभाएं हो रही है।लोगों को समझाया भी जा रहा है।आगे देखिए इसकी क्या परिणीति होती है।यह प्रश्न सबके दिमाग में है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर ,कांकेर( छ .ग.)
बढ़िया जानकारी
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