पता जुगानी केम्प कोण्डागांव छत्तीसगढ़
विधा कविता
शीर्षक पहला सावन
पहला सावन आया झूम के ।
मेघ काली छाने लगी है ।
रिमझिम बुंदे मन को भाने लगीं है ।
आसमां भी छुप गया बादल के आड़ में खुश हैं दिल आज सावन
के बहार में ।
देखो चारों हरियाली छाने
लगीं है मन को महकाने
लगीं है ।
सावन में मन बहुत जलता है ।
प्रियतम पास हो तों जीवन सम्भलता है ।
लगता है इस सावन प्रेम में कुछ कर जाऊं ।
जो है अपने उसे कहीं से ढुंड लाउं
हर बूंद कुछ कहती हैं ।
जन्म से मेरे नयन है प्यासे जैसे आंसू बनकर सावन में बहती है ।
very Nice sir
ReplyDeleteVeri nice sir
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteThanks
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