राज्य छत्तीसगढ़
शीर्षक मजदूर वर्ग ।
मजदूर से ही तो यह बड़े बड़े इमारतें बने हैं ।
मजदूर आज मुसीबत पर खड़े हैं ।
सर परिवार की जबावदरी ,बंद हो रहे ।
काम धाम से मील नहीं
पा रहे दिहाड़ी ।
देश को बनाने वाला घर तक आने को तरसता है ।
क्यो की अपनों को देखने के लिए मजदूर का दिल
भी धड़कता है ।
देश को भी बचाना है ,कौन अपना घर छोड़ बहार जाता है
ये तो पेट की भुख है सहाब ,हर इन्सान को यह वह दौडा़ता है ।
प्रकृति के संकट के आगे किसका बस चलता है ।
मजदूर तो पशीने
से सिंच कर देश बनाता है ।
कहीं गगन चुम्बी महल तो कहीं , बड़े पुल तैयार
करता है ।
पर भगवान की मर्जी
के आगे किसका बस चलता है ।
देखो विश्व में ऐसा समय आया है ।
अपना घर ही प्यारा है यह समझाया है ।
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