Sunday, September 8, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि शंभु कश्यप "दादा" की रचना हल्बी आमचो जीवना

नाम - शंभु कश्यप "दादा"
शीर्षक - हल्बी आमचो जीवना
सम्पर्क - 9406377737
स्थान - सुकमा
राज्य - छत्तीसगढ़

-----हल्बी आमचो जीवना-----

घरे लिपतो बरन माटी..
आई चो बनालो सुंदर टाटी..
संगवारी मन संगे खेलते रलू
रंग-रंग चो बाटी..
मित मन संगे होऊन सोर..
छेर-छेरा नाचूँ खोर-खोर..
पिला बेरा आया चो साड़ी झूलना..
पेटे बांधुन मके आया
मुण्डा जाये धरून चोलना..
दादा चो दांदर बाबा चो झारी..
बहार-सड़ार बेड़ा चो पारी..
आजू-दीदी चो धंधा पकानी
मैं सोयें बाबा चो पेट पोटारी..
आजी मके दखा खुबे सुरता पड़ेसे..
भुलका नाई हल्बी जीवना के
पिला-झिला मन पांय पड़ेंसे..

शहर जीवना के नि धरंवा
कोनी डराले नि डरंवा..
हल्बी जीवना के धरून चलंवा
टोरटा भाजी संगे हरंवा..
कांदूल दार आऊर चेच..
कोलियारी भाजी मण्डिया पेज..
चापड़ा चटनी तेतर झोर
सुक्सी संगे भेण्डा छोर
एयी सबू के खाऊन आई सौ बरख जियेसे..
भुलका नाई हल्बी जीवना के
पिला-झिला मन पांय पड़ेंसे..

भात खांऊ दोना-पतरी खिलुन
सबु कुटुम रहुँ मिलुन-झिलुन..
रापा-गंयती टंगिया-कूश
आमचो तिहार नोवा-अमूस..
नि बोलूँ आमी गोट आगर
बियान उठले बैला-नांगर..
हांसा बोकड़ी कुकड़ी चियां
सुंदर आमचो पखना कुड़िया..
गांय-गांय ने बोसे हाट
सांगदे सबु खोर बाट..
मरनी हो नाहले बिया
गांवरिया के दखांऊ नाट..
मोचो जीवना हल्बी काजे
गोट बले कम पड़ेसे..
भुलका नाई हल्बी जीवना के
पिला-झिला मन पांय पड़ेंसे..

गांव गोसिन गंगादई तुय आया परदेसीन..
आमी तो आंव नर लोक तुय आया उपरपुरीन..
नड़ेर-सुपारी पाक-फल
डोंडामाल आऊर गंगाजल..
सबु करम चो तुचो खेला
तुचो काजे मण्डई-मेला..
दुय पाहर तुचो आया मैं सेवा करेंसे..
हल्बी जीवना बाढते जाओ
आया तुके पांय पड़ेंसे।..

शंभु कश्यप (दादा)
      सुकमा

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