कवि -- महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक- - नशापान छोड़ो
संपर्क -- 8602407353
राज्य - छत्तीसगढ़
नशा नाश का जड़ है प्यारे , इसको मत अपनाओ ।
स्वस्थ अगर रहना चाहो तो , सादा भोजन खाओ ।।
इज्जत पैसे दोनों होते , एक साथ बर्बादी ।
रोज लड़ाई झगड़ा होते , बनो नहीं तुम आदी ।।
टूटे घर परिवार सभी से , रिश्ते नाते छोड़े ।
ऐसी आदत वालो से अब , काहे रिश्ता जोड़े ।।
खाने को लाले पड़ जाते , बच्चे भूखे सोते ।
जीना मुश्किल हो जाता है , कलप कलप कर रोते ।।
मद्यपान अब करना छोड़ो, सादगी को अपनाओ ।
मिट जायेगा क्लेश कलह सब , घर में खुशियाँ लाओ ।।
*महेन्द्र देवांगन माटी* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*
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