डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय :- फागुन
विधा :- दोहा छंद
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चलो मनायें हम सभी, रंगों का त्यौहार ।
राग द्वेष को छोड़कर, करें मृदुल व्यवहार ।
मनवा मेरा झूमता, देख पलाशी रंग ।
सब में मस्ती छा रही, छलक रहा है भंग ।
ढोल नगाड़े गा रहे, कितने सुन्दर फाग ।
पुरवाई की रागिनी , जगा रही अनुराग ।
नील गगन भी देखिए, झूम रहा है आज ।
गीत गा रहा फाग का, खोले दिल का राज़ ।
मतवाला मौसम हुआ, छेड़ फागुनी राग ।
साँस साँस में घुल रहा, वासंती अनुराग ।
🙏🙏
गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"
शानदार गजल आपकी
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteउच्चभावयुक्त सुमधुर धुन की रचना प्रशंसनीय है।
ReplyDeleteरचनाकार प्रणम्य है।