Wednesday, March 17, 2021

गजेन्द्र हरिहारनो" दीप" की रचना- फागुन

कवि :- गजेन्द्र हरिहारनो" दीप" 
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय :- फागुन
विधा  :- दोहा छंद
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चलो मनायें हम सभी, रंगों का त्यौहार ।
राग द्वेष को छोड़कर, करें मृदुल व्यवहार ।

मनवा मेरा झूमता, देख पलाशी रंग ।
सब में मस्ती छा रही, छलक रहा है भंग ।

ढोल नगाड़े गा रहे, कितने सुन्दर फाग ।
पुरवाई की रागिनी , जगा रही अनुराग ।

नील गगन भी देखिए, झूम रहा है आज ।
गीत गा रहा फाग का, खोले दिल का राज़ ।


मतवाला मौसम हुआ, छेड़ फागुनी राग ।
साँस साँस में घुल रहा, वासंती अनुराग ।

           🙏🙏
गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"

3 comments:

  1. शानदार गजल आपकी

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  2. बहुत सुंदर रचना

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  3. उच्चभावयुक्त सुमधुर धुन की रचना प्रशंसनीय है।
    रचनाकार प्रणम्य है।

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