Wednesday, March 17, 2021

एच-एस-अरमो की रचना- फागुन

रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विषय-फागुन  ।
विधा- छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-"" फागुन """    ।
===========$$$$$$======

●●●●•••|| फागुन ||•••●●●
                 ========
ये री सखी,फागुन आयो--
तन-मन में,मस्ती है छायो ।

वो री सखी,मोरे पिया,गये हैं परदेश--
उनकी भारी,याद है सताती ,
मन में,अजीब-सी कसक है उठती,
ना लागे,मोरा जिया किसी कारज में,
रातें कटती हैं,बिस्तर में,
करवट बदल-बदलकर के--।

क्या,पिया मिलन की तड़पन --
ऐसी होती है,मुझको भी बताओ,
ये मेरी,प्यारी सखी रे --
क्या,ऐसा ही,एहसास भी--
उनको भी होता होगा क्या--?
ये री सखी,मुझे भी बताना --?

पहली-पहली बार फागुन आया है---
और प्रियतम से,हो रही दूरी मेरी,
ना कर पाऊँगी ,उनसे कोई भी,
जोरा-जोरी,रँग भी,लागे फीका-फीका। 

फागुन में,चलत ऐसी बयार--
हल्की-फुल्की तपिश लिए,
रबी की फसल लहलहाएगी,
इस तपिश से,धीरे-धीरे फसलें,
पकने लग जायेगी और--
किसानों में भी,खुशियाँ छा जायेगी।

फागुन की,रंग भरी मस्ती के साथ--
टेसू के फूलों का रंग है गहराता,
अमुआ में,छोटी छोटी सी कैरी,
अंगूर सी ,झुग्गे में,नजर आती,
कोयल की कूक भी सुनाई देती,
महुआ की गदराई कुचियाँ से,
महुआ टपकने को,होता है लालयीत ।

पतझड़ की होती है समाप्ति--
दरख्तों में आने लगती हैं कोपलें,
ठुटे पेड़ों में,रौनक छाने लगती ,
बंदरों को,कोपलें खाने हैं मिलती ।

हिंदी महीनों का फागुन होता है--
अन्तिम मास,चैत्र नवरात्रि का,
होने लगता है,देवी भाव का आगाज,
ग्रीष्म ऋतु की,गर्म हवा की शुरुआत ।

फागुन है,रंगों का त्यौहार--
सब लोगों में,छाता रंगीला खुमार,
सारे भेद भूला,रंगते हैं,एक रंग में,
खूबसूरत पर्व की,सद्भावना को ,
कभी भी,मलिनता में,ना बदलें  ।

गेहूँ और चने का होरा--
इसकी सौंधी-सौंधी,मीठा स्वाद ,
खेत-खलिहानों के रखवारों को भाये,
गेहूँ,चने के आटे से  बनाते हैं सत्तू--।
=======$$$$$$$$$=======

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...