जिला-कोरबा छ.ग.
विषय-बसंत पंचमी
विधा-कविता
शीर्षक- सरस्वती जी की वंदना
---------प्रेरित कर माँ सरस्वती !
वेदना मेरी मुखरित हो जाए ।
अश्रुपूरित आँखों को मेरी,
सपनों की मंजिल मिल जाए ।
नीर बहाती इन आँखों को,
सपनों की सुरमा मिल जाए ।
अरमानों के परवाजों को ,
साहस की.पंखी मिल जाए ,
पिंजरे की तोता न बन कर,
नील गगन की हंसा बन जाए ।
अवसाद भरे मेरे मन में माँ!
उत्साह, उमंग की लहरें भर जाए।
ज्ञान कलश मुझे दे दो माँ !
मेरे मन की घोर तिमिर मिट जाए ।
नींब में मेरी वास करो माँ !
लेखनी मेरी आबाद हो जाए ।
प्रेरित कर माँ सरस्वती!
वेदना मेरी मुखरित हो जाए ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
बहुत सुंदर कविता,ज्ञान की देवी मां सरस्वती से ज्ञान और प्रकाश की वंदना बहुत सुंदर शव्दों में की गई है।
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