खैरागढ़
जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
विधा _छप्पय छंद
शीर्षक *बसंत*
आया पर्व बसंत, बने ऋतुओं का राजा।
लगे नाचने वृक्ष, बजे है ढोलक बाजा।
पीले सरसो फूल, लगे मन को अति भावन।
सुंदर फूल पलाश, दिखे हैं अनुपम पावन।
आम लदे हैं मंजिरें, कोयल कूके डाल है।
झूम रहा सारा जगत , मन अति हर्ष निहाल है।।
आया देख बसंत, रूप मौसम का निखरे।
धरती श्यामल शस्य, स्वर्ण हरियाली बिखरे।
पवन चले चहुँ ओर, रूप है चंचल लगती।
मन में उठे हिलोर, प्रीत हिय में है भरती।
धरा करें श्रृंगार है, सज कर दुल्हन रूप में।
चुनरी ओढ़े पीत है, लगे सुहानी धूप में।।
है ऋतुराज बसंत, महीना भक्ति भाव का।
करें दानअरु पुण्य, भक्ति पूजा प्रभाव का।
मिलता पुण्य विशेष, देव की पूजा करके।
भरकर हृदय उमंग, खुशी है लाता भरके।
माघ मास पावन सदा, हरे शीत संताप को।
दान ध्यान करके सदा,पाएं पुण्य प्रताप को।।
पद्मा साहू
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