Tuesday, October 13, 2020

कोलकाता से दर्शना शर्मा की रचना- खामोशी

कवयित्री -दर्शना शर्मा
राज्य- प. बंगाल
शीर्षक-खामोशी 
विधा-छंद मुक्त
रस -श्रृंगार
कविता-खामोशी

रात का सन्नाटा
सब तरफ 
खामोश ही खामोश
चारों ओर है अंधियाली छायी
 रात्रि ने है  ।
अपनी खामोशी बिखरायी।।

 टिम -टिम करते हैं तारे
 चंद्र-किरणें अपनी छटा से 
उजियारा  बिखरा रही

 एक परछाई चली जा रही 
है  मगर  खामोश 
कोई चला आ रहा है 
वहां से
 है मगर खामोश 

खामोश निगाहों ने 
खामोश निगाहों को देखा 
प्रेम है दिलों में 
मगर हैं छिपायें
 मन्दिर और मस्जिद हैं 
आडे़ आये
  साहस नहीं कुछ कर जायें
 अपने प्यार को 
आगे बढ़ायें।।

रहते हैं बस हमेशा
खामोश ही खामोश।।


1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...