जिला/राज्य- गरियाबंद(छ:ग)
शीर्षक- नही रोक पाए उसे
विधा- छंद मुक्त
नही रोक पाए उसे,
पलकों में बिठाया जिसे।
अश्क़ बनके बह गये वो
ज़िन्दगी था माना जिसे।।
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पास आ के भी दूर किया,
दिल को क्यो मजबूर किया।
छोड़ के जब जाना ही था,
तो क्यो मुझसे प्यार किया।।
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"दिलजला"भला क्या करे,
माना था तक़दीर जिसे।
कर गए वो भी तन्हा
समझ के गरीब मुझे।।
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दुआ है बस उस रब से,
न लगे मेरी बद्दुआ उसे।
प्यार में उसने जो दिया,
अब ना सजा दे उसे।।
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