जिला -बिलासपुर (छ. ग. )
शीर्षक -वातावरण को करें पावन
विधा -गीत (मात्रा भार --16, 13)
जिसका आवरण है चहुँ ओर,
वातावरण है पावन l
सदा बाधा से करे संरक्षित,
जगो जीवन है भावन l
धरती माता है अति पावन,
देत सबको ये साधन l
स्वच्छ, पवित्र हमारा सपना,
मात धरा लगे गावन ll
जल से मानव तरल प्रफुल्लित,
हरदम जहाँ में सावन l
शुद्ध हो ताल, तलैया, नदिया,
होता तभी प्रभु आवन ll
पावक देत पोषण उदर को,
जठर तत्व पचात लावन l
चक्र बना है इसका अनवरत,
खाक करते हैं खावन ll
गगन विशाल में समाये सब,
चाँद, सूरज है तारन l
गति अमर धारक सबका यह,
साधते रहते धावन ll
हवा सभी में प्राण फूके है,
भागे है रोग रावन l
शुद्धि इसकी हम करेंगे साथी,
मृत्यु करो जग से जावन ll
व्याख्या - प्रकृति की उपज वातावरण अच्छा और शुद्ध तभी होगा, जब पृथ्वी, जल, आग, आकाश, हवा ये तत्व शुद्ध होंगे और तभी मानव अमरत्व की ओर बढ़ेगा l
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