Friday, May 22, 2020

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से महेन्द्र देवांगन माटी की रचना- पेड़ लगावव

रचनाकार  -- महेन्द्र देवांगन माटी 
जिला  -- कबीरधाम 
शीर्षक  -- पेड़ लगावव 
विधा -- लावणी छंद 

पेड़ लगावव मिलजुल संगी , तभे तुमन फल पाहू जी ।
बड़का होही बिरवा तब तो , सबझन छँइहा पाहू जी ।।1।।

मिलही छ़ँइहा घर अँगना मा , पंछी के होही डेरा ।
चिरई चिरगुन चहकत रइही,  रोज लगाही जी फेरा ।।2।।

सुघ्घर खुशबू आही घर मा , छाया मा सुरताहू जी ।
पेड़ लगावव मिलजुल संगी , तभे तुमन फल पाहू जी ।।3।।

जंगल झाड़ी रहिथे तब तो , होथे जी बरसा पानी ।
धान पान सब बढ़िया होथे  , चलथे सुघ्घर जिनगानी ।।4।।

आज लगालव सबझन बिरवा , नइते सब पछताहू जी ।
पेड़ लगावव मिलजुल संगी  , तभे तुमन फल पाहू जी ।।5।।

महेन्द्र देवांगन माटी
 पंडरिया छत्तीसगढ़

1 comment:

  1. धन्यवाद यादव जी

    महेन्द्र देवांगन माटी

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