जिला -- कबीरधाम
शीर्षक -- पेड़ लगावव
विधा -- लावणी छंद
पेड़ लगावव मिलजुल संगी , तभे तुमन फल पाहू जी ।
बड़का होही बिरवा तब तो , सबझन छँइहा पाहू जी ।।1।।
मिलही छ़ँइहा घर अँगना मा , पंछी के होही डेरा ।
चिरई चिरगुन चहकत रइही, रोज लगाही जी फेरा ।।2।।
सुघ्घर खुशबू आही घर मा , छाया मा सुरताहू जी ।
पेड़ लगावव मिलजुल संगी , तभे तुमन फल पाहू जी ।।3।।
जंगल झाड़ी रहिथे तब तो , होथे जी बरसा पानी ।
धान पान सब बढ़िया होथे , चलथे सुघ्घर जिनगानी ।।4।।
आज लगालव सबझन बिरवा , नइते सब पछताहू जी ।
पेड़ लगावव मिलजुल संगी , तभे तुमन फल पाहू जी ।।5।।
महेन्द्र देवांगन माटी
पंडरिया छत्तीसगढ़
धन्यवाद यादव जी
ReplyDeleteमहेन्द्र देवांगन माटी